भारतीय गणतंत्र की 68 वीं वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनायें श्रीमान
जय हिन्द
जय भारत
हर कण दीपित उच्च पताका।
यही भारती को मन भाता।
पवन गुंजरित करती है ।
हर ओर महानायक गाथा।
सीमा पर अडिग महारथ है।
हर स्वांस देश को यह पहुंचाता।
ये तेजस्वी औ ओजस्वी
पूरनमासी का चंदा है।
पुलकित है सिंधू झेलम औ रावी
है मधुमय गान किए।
हर्षित है गंगा यमुना भी
ये नृत्य दिखाती मान लिए।
हर दिशा मयूर नर्तकी है
जो पुष्पित तंत्र बखान किये।
खेतों की सुरभित हरियाली पर
गगन तलक इठलाता है।
गुलमर्ग पिपाशा अभिलाषा पर
नगाधिराज बलखाता है।
भारत सन्तति कर्मठ युद्धा
अमरीका चीन बताता है।
पर हाय!! ये राजनीति छल की
जो पीएम तक शर्माता है।
नेता की नियत बुरी तमसी
जो भारत को ही दबाता है।
अमृत राशी गंगा को जो
विशानुरक्त बताता है।
कैसे कैसे पाप धो दिए माता तूने।
किस किस का उद्धार कर दिया माता तूने।
पर हाय!! कि जब से नेता जी उतरे है गंगास्नान किये।
गंगा की पावन निर्मलता कलुषित और विषाक्त लिए।
अब कैसे स्वच्छ बनें गंगा अब विषय यही सर्वोत्तम है।
ये अपने तन मन देखे न
और गंगा तुझको साफ किये?
गर कर लेते साफ आचरन
गंगा निर्मल हो जाती।
और तुम्हे क्या बतलाएं जिह्वा
है मेरी दुःख जाती।
और तुम्हे क्या बतलाएं........
चंद्रसेन"अंजान"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें