नित-प्रतिदिन सीमा पर तूने है उत्पात मचा रक्खा।
काश्मीर की घाटी को है युद्ध मचान बना रक्खा।
दिल्ली मुम्बई और पंजाब पर भी बुरी नजर डाली है।
सोये हुए सिंह को तूने घोर चुनौती दे डाली है।
अनल आहुती देने को उद्गमित भारती आ निकली।
करने को मर्दन ग्रीवा को जो यशस्विनी अलोक बनी।
किंकरित गूंज चहुंओर दिखे,उदघोष विजय अनुनाद करे।
भरतवंश के गौरवहित जो सैन्यशिखा संचार करे।
अतुलित भीष्म अनवरत ही सुत भारति के हुंकार भरे।
दसों दिशाएं आज हैं डरकर निष्कासन साकार किये।
चहुंओर सुनाई देता है डिंडिम् अनुनाद जवानों का।
रावी झेलम और चिनाब रक्तिम हैं हर्षित चंडी सा।
अब तीक्ष्ण नजर मत करना तुम,सुधरो हरकत नादानी है।
हम शांतिपुंज अभ्युदय साकी,अब ये नीरस नीच कहानी है।
तुम किस गफलत में पड़े हुए,कश्मीर न प्रिये तुम्हारी है।
ये चिंतनीय चिंतन करना, वरना फिर ख़त्म कहानी है।
Good
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